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- ...(इमैजिनरी यूनिट), जिसे '''''i''''' द्वारा निरूपित किया जाता है, एक [[गणित|गणितीय]] अवधारणा है जो [[वास्तविक संख्या]] निकाय ''ℝ'' को [[समिश्र संख्या|सम्मिश्र [[श्रेणी:गणितीय अवधारणाएँ]] ...२ KB (१०४ शब्द) - १७:५७, १७ नवम्बर २०२१
- ...''तत्त्व''' या '''सदस्य''' (जिसे '''अवयव''' भी कहते है), कोई भी एक भिन्न [[गणितीय वस्तु|वस्तु]] है जो उस समुच्चय को बनाता है। ...१ KB (३८ शब्द) - ०७:०३, ८ मार्च २०२४
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- [[श्रेणी:गणितीय तर्क]] ...१७ KB (६१५ शब्द) - ०८:१९, २० फ़रवरी २०२५
- [[श्रेणी:गणितीय भौतिकी]] ...१९ KB (१,०१६ शब्द) - ०५:१४, १४ मार्च २०२४
- ...पर उद्धृत किया गया है और जो आधुनिक समय में भी अस्तित्व में है। आर्यभटीय के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति शामिल हैं। इ ...ref>डेनिस डयुक्, " भारत में सम पद : प्राचीन भारतीय ग्रह सम्बन्धी मॉडलों का गणितीय आधार."''सटीक विज्ञान के इतिहास का पुरालेख'' ५९ (२००५): ५६३-५७६, एन. 4 [http ...७६ KB (१,५२८ शब्द) - १९:०६, १२ फ़रवरी २०२५
- ...ुत क्षेत्र]] का लोरेन्ज रूपांतरण के परिणामस्वरूप [[चुम्बकीय क्षेत्र]] नामक गणितीय व्यंजक प्रकट होती है। इसी प्रकार गतिशील आवेश से व्युत्पन ''चुम्बकीय'' क्षेत न्यूटनीय यांत्रिकी गणितीय रूप से निम्न वेगों (प्रकाश के वेग की तुलना में) पर विशिष्ट आपेक्षिकता का पा ...१३६ KB (४,०३१ शब्द) - ११:५५, ४ जून २०२४
- ...धतियों के मॉडल हैं। 1950 के दशक में, गणितज्ञ [[स्टीफेन कोल क्लीन]] ने अपने गणितीय संकेतन का प्रयोग करते हुए इन मॉडलों का सविस्तार वर्णन किया, जिसे ''रेगुलर स ...९४ KB (२,३४७ शब्द) - ०३:४०, २४ नवम्बर २०२३